इश्क़ का मतलब किसे मालूम था
जिन दिनों आए थे हम दिल हार के
नोमान शौक़
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इश्क़ क्या है ख़ूबसूरत सी कोई अफ़्वाह बस
वो भी मेरे और तुम्हारे दरमियाँ उड़ती हुई
नोमान शौक़
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इश्क़ में सच्चा था वो मेरी तरह
बेवफ़ा तो आज़माने से हुआ
नोमान शौक़
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इतनी ताज़ीम हुई शहर में उर्यानी की
रात आँखों ने भी जी भर के बदन-ख़्वानी की
नोमान शौक़
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जाने किस उम्मीद पे छोड़ आए थे घर-बार लोग
नफ़रतों की शाम याद आए पुराने यार लोग
नोमान शौक़
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जान-ए-जाँ मायूस मत हो हालत-ए-बाज़ार से
शायद अगले साल तक दीवाना-पन मिलने लगे
नोमान शौक़
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जिज़्या वसूल कीजिए या शहर उजाड़िए
अब तो ख़ुदा भी आप की मर्ज़ी का हो गया
नोमान शौक़
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