EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ये क्या सबब जो इधर चाँदनी नहीं आती
ख़ुदा ने चाँद बनाया है सब के घर के लिए

लाला माधव राम जौहर




ये सब ग़लत है कि होती है दिल को दिल से राह
किसी को ख़ाक किसी का ख़याल होता है

लाला माधव राम जौहर




ये समझ ले मैं बुरा हूँ कि भला हूँ लेकिन
लोग बंदे को गुनहगार तिरा कहते हैं

लाला माधव राम जौहर




ये वाइज़ कैसी बहकी बहकी बातें हम से करते हैं
कहीं चढ़ कर शराब-ए-इश्क़ के नश्शे उतरते हैं

लाला माधव राम जौहर




यूँ मोहब्बत से जो चाहे कोई अपना कर ले
जो हमारा न हो उस के कहीं हम होते हैं

लाला माधव राम जौहर




यूँ तो मुँह देखने की होती है मोहब्बत सब को
जब मैं जानूँ कि मिरे ब'अद मिरा ध्यान रहे

लाला माधव राम जौहर




ज़रा रहने दो अपने दर पे हम ख़ाना-ब-दोशों को
मुसाफ़िर जिस जगह आराम पाते हैं ठहरते हैं

लाला माधव राम जौहर