दरिया की तरह रवाँ हूँ लेकिन
अब तक भी वहीं हूँ मैं जहाँ हूँ
इस्माइल मेरठी
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दीद वा दीद की रुख़्सत ही सही
मेरे हिस्से की क़यामत ही सही
इस्माइल मेरठी
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दिलबरी जज़्ब-ए-मोहब्बत का करिश्मा है फ़क़त
कुछ करामत नहीं जादू नहीं एजाज़ नहीं
इस्माइल मेरठी
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दोस्ती और किसी ग़रज़ के लिए
वो तिजारत है दोस्ती ही नहीं
इस्माइल मेरठी
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गर देखिए तो ख़ातिर-ए-नाशाद शाद है
सच पूछिए तो है दिल-ए-नाकाम काम का
इस्माइल मेरठी
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गर ख़ंदा याद आए तो सीने को चाक कर
गर ग़म्ज़ा याद आए तो ज़ख़्म-ए-सिनाँ उठा
इस्माइल मेरठी
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हब्स-ए-दवाम तो नहीं दुनिया कि मर रहूँ
काहे को घर ख़याल करूँ रहगुज़र को मैं
इस्माइल मेरठी
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