कट गई एहतियात-ए-इश्क़ में उम्र
हम से इज़हार-ए-मुद्दआ न हुआ
हसरत मोहानी
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ख़ंदा-ए-अहल-ए-जहाँ की मुझे पर्वा क्या है
तुम भी हँसते हो मिरे हाल पे रोना है यही
हसरत मोहानी
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खींच लेना वो मिरा पर्दे का कोना दफ़अतन
और दुपट्टे से तिरा वो मुँह छुपाना याद है
हसरत मोहानी
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ख़ूब-रूयों से यारियाँ न गईं
दिल की बे-इख़्तियारियाँ न गईं
हसरत मोहानी
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कोशिशें हम ने कीं हज़ार मगर
इश्क़ में एक मो'तबर न हुई
हसरत मोहानी
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मालूम सब है पूछते हो फिर भी मुद्दआ'
अब तुम से दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम
हसरत मोहानी
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मानूस हो चला था तसल्ली से हाल-ए-दिल
फिर तू ने याद आ के ब-दस्तूर कर दिया
हसरत मोहानी
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