जिस लफ़्ज़ को मैं तोड़ के ख़ुद टूट गया हूँ
कहता भी तो वो उस को गवारा नहीं होता
मोहसिन असरार
जिस दिन के गुज़रते ही यहाँ रात हुई है
ऐ काश वो दिन मैं ने गुज़ारा नहीं होता
मोहसिन असरार
आँख से आँख मिलाना तो सुख़न मत करना
टोक देने से कहानी का मज़ा जाता है
मोहसिन असरार
जैसे सज्दे में क़त्ल हो कोई
ऐसा होता है चाहतों का मज़ा
मोहसिन असरार
जगह बदलने से हैअत कहाँ बदलती है
जो आइना है सदा आइना रहेगा वो
मोहसिन असरार
हवा चराग़ बुझाने लगी तो हम ने भी
दिए की लौ की जगह तेरा इंतिज़ार रखा
मोहसिन असरार
हम-साए का सुख तो उस के ख़्वाब का पूरा होना है
तुम पर रिक़्क़त तारी हो तो रो लो लेकिन शोर न हो
मोहसिन असरार
हम अपने ज़ाहिर ओ बातिन का अंदाज़ा लगा लें
फिर उस के सामने जाने की तय्यारी करेंगे
मोहसिन असरार
घर में रहना मिरा गोया उसे मंज़ूर नहीं
जब भी आता है नया काम बता जाता है
मोहसिन असरार

