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हरी चंद अख़्तर शायरी | शाही शायरी

हरी चंद अख़्तर शेर

15 शेर

अगर तेरी ख़ुशी है तेरे बंदों की मसर्रत में
तो ऐ मेरे ख़ुदा तेरी ख़ुशी से कुछ नहीं होता

हरी चंद अख़्तर




भरोसा किस क़दर है तुझ को 'अख़्तर' उस की रहमत पर
अगर वो शैख़-साहिब का ख़ुदा निकला तो क्या होगा

हरी चंद अख़्तर




हाँ वो दिन याद हैं जब हम भी कहा करते थे
इश्क़ क्या चीज़ है इस इश्क़ में क्या होता है

हरी चंद अख़्तर




हमें भी आ पड़ा है दोस्तों से काम कुछ यानी
हमारे दोस्तों के बेवफ़ा होने का वक़्त आया

I need a favour from my friends so now
the time has come for them to disavow

हरी चंद अख़्तर




जम्अ हैं सारे मुसाफ़िर ना-ख़ुदा-ए-दिल के पास
कश्ती-ए-हस्ती नज़र आती है अब साहिल के पास

हरी चंद अख़्तर




जिन्हें हासिल है तेरा क़ुर्ब ख़ुश-क़िस्मत सही लेकिन
तेरी हसरत लिए मर जाने वाले और होते हैं

हरी चंद अख़्तर




जो ठोकर ही नहीं खाते वो सब कुछ हैं मगर वाइज़
वो जिन को दस्त-ए-रहमत ख़ुद सँभाले और होते हैं

हरी चंद अख़्तर




मिलेगी शैख़ को जन्नत हमें दोज़ख़ अता होगा
बस इतनी बात है जिस बात पर महशर बपा होगा

the priest to paradise, and I to hell arraigned
will, on such a trifle, be judgement day ordained?

हरी चंद अख़्तर




मुझ को देखा फूट के रोया
अब समझा समझाने वाला

हरी चंद अख़्तर