आ रही है चाह-ए-यूसुफ़ से सदा
दोस्त याँ थोड़े हैं और भाई बहुत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
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आगे बढ़े न क़िस्सा-ए-इश्क़-ए-बुताँ से हम
सब कुछ कहा मगर न खुले राज़-दाँ से हम
अल्ताफ़ हुसैन हाली
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बहुत जी ख़ुश हुआ 'हाली' से मिल कर
अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जहाँ में
अल्ताफ़ हुसैन हाली
बे-क़रारी थी सब उम्मीद-ए-मुलाक़ात के साथ
अब वो अगली सी दराज़ी शब-ए-हिज्राँ में नहीं
अल्ताफ़ हुसैन हाली
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चोर है दिल में कुछ न कुछ यारो
नींद फिर रात भर न आई आज
अल्ताफ़ हुसैन हाली
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धूम थी अपनी पारसाई की
की भी और किस से आश्नाई की
अल्ताफ़ हुसैन हाली
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दिखाना पड़ेगा मुझे ज़ख़्म-ए-दिल
अगर तीर उस का ख़ता हो गया
अल्ताफ़ हुसैन हाली
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