मौसम कोई भी हो पे बदलता नहीं हूँ मैं
या'नी किसी भी साँचे में ढलता नहीं हूँ मैं
सरफ़राज़ ख़ालिद
मिलते हो तो अब तुम भी बहुत रहते हो ख़ामोश
क्या तुम को भी अब मेरी ख़बर होने लगी है
सरफ़राज़ ख़ालिद
मिरे मरने का ग़म तो बे-सबब होगा कि अब के बार
मिरे अंदर तो कोई और पैदा होने वाला है
सरफ़राज़ ख़ालिद
मिरे मरने का ग़म तो बे-सबब होगा कि अब के बार
मिरे अंदर तो कोई और पैदा होने वाला है
सरफ़राज़ ख़ालिद
न चाँद का न सितारों न आफ़्ताब का है
सवाल अब के मिरी जाँ तिरे जवाब का है
सरफ़राज़ ख़ालिद
न चाँद का न सितारों न आफ़्ताब का है
सवाल अब के मिरी जाँ तिरे जवाब का है
सरफ़राज़ ख़ालिद
न रात बाक़ी है कोई न ख़्वाब बाक़ी है
मगर अभी मिरे ग़म का हिसाब का बाक़ी है
सरफ़राज़ ख़ालिद

