देर तक जागते रहने का सबब याद आया
तुम से बिछड़े थे किसी मोड़ पे अब याद आया
सरफ़राज़ ख़ालिद
देर तक जागते रहने का सबब याद आया
तुम से बिछड़े थे किसी मोड़ पे अब याद आया
सरफ़राज़ ख़ालिद
दिल जो टूटा है तो फिर याद नहीं है कोई
इस ख़राबे में अब आबाद नहीं है कोई
सरफ़राज़ ख़ालिद
एक दिन उस की निगाहों से भी गिर जाएँगे
उस के बख़्शे हुए लम्हों पे बसर करते हुए
सरफ़राज़ ख़ालिद
एक दिन उस की निगाहों से भी गिर जाएँगे
उस के बख़्शे हुए लम्हों पे बसर करते हुए
सरफ़राज़ ख़ालिद
हम किसी और वक़्त के हैं असीर
सुब्ह के शाम के रहे ही नहीं
सरफ़राज़ ख़ालिद
हमारे काँधे पे इस बार सिर्फ़ आँखें हैं
हमारे काँधे पे इस बार सर नहीं है कोई
सरफ़राज़ ख़ालिद

