अब मुझ में कोई बात नई ढूँढने वालो
अब मुझ में कोई बात पुरानी भी नहीं है
सरफ़राज़ ख़ालिद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
अब मुझ में कोई बात नई ढूँढने वालो
अब मुझ में कोई बात पुरानी भी नहीं है
सरफ़राज़ ख़ालिद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
अजीब फ़ुर्सत-ए-आवारगी मिली है मुझे
बिछड़ के तुझ से ज़माने का डर नहीं है कोई
सरफ़राज़ ख़ालिद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अपने ही साए से हर गाम लरज़ जाता हूँ
मुझ से तय ही नहीं होती है मसाफ़त मेरी
सरफ़राज़ ख़ालिद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
बादा-ओ-जाम के रहे ही नहीं
हम किसी काम के रहे ही नहीं
सरफ़राज़ ख़ालिद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
बादा-ओ-जाम के रहे ही नहीं
हम किसी काम के रहे ही नहीं
सरफ़राज़ ख़ालिद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
बात तो ये है कि वो घर से निकलता भी नहीं
और मुझ को सर-ए-बाज़ार लिए फिरता है
सरफ़राज़ ख़ालिद
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

