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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

सारे शिकवे दूर हो जाएँ जो क़ुदरत सौंप दे
मेरी दानाई तुझे और तेरी नादानी मुझे

सरफ़राज़ शाहिद




'शाहिद'-साहिब कहलाते हैं मिस्टर भी मौलाना भी
हज़रत दो किरदारों वाले हेरा-फेरी करते हैं

सरफ़राज़ शाहिद




स्पैशलिस्ट पेन-किलर दे तो कौन सा?
''सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है''

सरफ़राज़ शाहिद




सुरूर-ए-जाँ-फ़ज़ा देती है आग़ोश-ए-वतन सब को
कि जैसे भी हों बच्चे माँ को प्यारे एक जैसे हैं

सरफ़राज़ शाहिद




सुरूर-ए-जाँ-फ़ज़ा देती है आग़ोश-ए-वतन सब को
कि जैसे भी हों बच्चे माँ को प्यारे एक जैसे हैं

सरफ़राज़ शाहिद




ज़िंदा रहने का हक़ मिलेगा उसे
जिस में मरने का हौसला होगा

सरफ़राज़ अबद




चंद लम्हे को तू ख़्वाबों में भी आ कर झाँक ले
ज़िंदगी तुझ से मिले कितने ज़माने हो गए

सरफ़राज़ दानिश