ख़त-ए-शौक़ को पढ़ के क़ासिद से बोले
ये है कौन दीवाना ख़त लिखने वाला
साइल देहलवी
ख़त-ए-शौक़ को पढ़ के क़ासिद से बोले
ये है कौन दीवाना ख़त लिखने वाला
साइल देहलवी
खिल गई शम्अ तिरी सारी करामात-ए-जमाल
देख परवाने किधर खोल के पर जाते हैं
साइल देहलवी
मालूम नहीं किस से कहानी मिरी सुन ली
भाता ही नहीं अब उन्हें अफ़्साना किसी का
साइल देहलवी
मोहतसिब तस्बीह के दानों पे ये गिनता रहा
किन ने पी किन ने न पी किन किन के आगे जाम था
साइल देहलवी
मोहतसिब तस्बीह के दानों पे ये गिनता रहा
किन ने पी किन ने न पी किन किन के आगे जाम था
साइल देहलवी
तुम आओ मर्ग-ए-शादी है न आओ मर्ग-ए-नाकामी
नज़र में अब रह-ए-मुल्क-ए-अदम यूँ भी है और यूँ भी
साइल देहलवी

