तुम न मानो मगर हक़ीक़त है
इश्क़ इंसान की ज़रूरत है
क़ाबिल अजमेरी
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तुम्हारी गलियों में फिर रहा हूँ
ख़याल-ए-रस्म-ए-वफ़ा है वर्ना
क़ाबिल अजमेरी
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उन की पलकों पर सितारे अपने होंटों पे हँसी
क़िस्सा-ए-ग़म कहते कहते हम कहाँ तक आ गए
क़ाबिल अजमेरी
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वक़्त करता है परवरिश बरसों
हादिसा एक दम नहीं होता
क़ाबिल अजमेरी
ये गर्दिश-ए-ज़माना हमें क्या मिटाएगी
हम हैं तवाफ़-ए-कूचा-ए-जानाँ किए हुए
क़ाबिल अजमेरी
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ये सब रंगीनियाँ ख़ून-ए-तमन्ना से इबारत हैं
शिकस्त-ए-दिल न होती तो शिकस्त-ए-ज़िंदगी होती
क़ाबिल अजमेरी
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ज़माना दोस्त है किस किस को याद रक्खोगे
ख़ुदा करे कि तुम्हें मुझ से दुश्मनी हो जाए
क़ाबिल अजमेरी
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