तिरे फ़िराक़ की रातें कभी न भूलेंगी
मज़े मिले उन्हीं रातों में उम्र भर के मुझे
नासिर काज़मी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
तुझ बिन सारी उम्र गुज़ारी
लोग कहेंगे तू मेरा था
नासिर काज़मी
टैग:
| Hijr |
| 2 लाइन शायरी |
तू ने तारों से शब की माँग भरी
मुझ को इक अश्क-ए-सुब्ह-गाही दे
नासिर काज़मी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
उम्र भर की नवा-गरी का सिला
ऐ ख़ुदा कोई हम-नवा ही दे
नासिर काज़मी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
उन्हें सदियों न भूलेगा ज़माना
यहाँ जो हादसे कल हो गए हैं
नासिर काज़मी
टैग:
| Hadsa |
| 2 लाइन शायरी |
उस ने मंज़िल पे ला के छोड़ दिया
उम्र भर जिस का रास्ता देखा
नासिर काज़मी
टैग:
| मंज़िल |
| 2 लाइन शायरी |
वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर'
ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
नासिर काज़मी
टैग:
| वक्त |
| 2 लाइन शायरी |

