तरीक़ याद है पहले से दिल लगाने का
उसी का मैं भी हूँ मजनूँ था जिस घराने का
मुज़्तर ख़ैराबादी
तरीक़ याद है पहले से दिल लगाने का
उसी का मैं भी हूँ मजनूँ था जिस घराने का
मुज़्तर ख़ैराबादी
तसव्वुर ख़ाना-आबादी करेगा
तिरे घर मैं रहूँगा मेरे घर तू
मुज़्तर ख़ैराबादी
तसव्वुर में तिरा दर अपने सर तक खींच लेता हूँ
सितमगर मैं नहीं चलता तिरी दीवार चलती है
मुज़्तर ख़ैराबादी
तेरे घर आएँ तो ईमान को किस पर छोड़ें
हम तो काबे ही में ऐ दुश्मन-ए-दीं अच्छे हैं
मुज़्तर ख़ैराबादी
तेरे मूए-ए-मिज़ा खटकते हैं
दिल के छालों में नोक-ए-ख़ार कहाँ
मुज़्तर ख़ैराबादी
तेरी रहमत का नाम सुन सुन कर
मुब्तला हो गया गुनाहों में
मुज़्तर ख़ैराबादी

