अनासिर की कोई तरतीब क़ाएम रह नहीं सकती
तग़य्युर ग़ैर-फ़ानी है तग़य्युर जावेदानी है
मतीन नियाज़ी
बच्चों का सा मिज़ाज है तख़्लीक़-कार का
अपने सिवा किसी को बड़ा मानता नहीं
मतीन नियाज़ी
फ़ज़ा में गूँज रही हैं कहानियाँ ग़म की
हमीं को हौसला-ए-शरह-ए-दास्ताँ न रहा
मतीन नियाज़ी
ग़म की तशरीह हँसी-खेल नहीं है कोई
पहले इंसान तू बिन फिर ये हुनर पैदा कर
मतीन नियाज़ी
ग़म-ए-इंसाँ को सीने से लगा लो
ये ख़िदमत बंदगी से कम नहीं है
मतीन नियाज़ी
ग़म-ए-मआल ग़म-ए-ज़िंदगी ग़म-ए-दौराँ
हमारे इश्क़ का चर्चा कहाँ कहाँ न रहा
मतीन नियाज़ी
गुलशन के परस्तारो तुम को तो पता होगा
वो कौन हैं आख़िर जो कलियों को मसलते हैं
मतीन नियाज़ी

