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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है

जोश मलीहाबादी




मिला जो मौक़ा तो रोक दूँगा 'जलाल' रोज़-ए-हिसाब तेरा
पढूँगा रहमत का वो क़सीदा कि हँस पड़ेगा अज़ाब तेरा

जोश मलीहाबादी




मिले जो वक़्त तो ऐ रह-रव-ए-रह-ए-इक्सीर
हक़ीर ख़ाक से भी साज़-बाज़ करता जा

जोश मलीहाबादी




मुझ को तो होश नहीं तुम को ख़बर हो शायद
लोग कहते हैं कि तुम ने मुझे बर्बाद किया

जोश मलीहाबादी




पहचान गया सैलाब है उस के सीने में अरमानों का
देखा जो सफ़ीने को मेरे जी छूट गया तूफ़ानों का

जोश मलीहाबादी




शबाब-ए-रफ़्ता के क़दम की चाप सुन रहा हूँ मैं
नदीम अहद-ए-शौक़ की सुनाए जा कहानियाँ

जोश मलीहाबादी




सिर्फ़ इतने के लिए आँखें हमें बख़्शी गईं
देखिए दुनिया के मंज़र और ब-इबरत देखिए

जोश मलीहाबादी