जो दिन चढ़ा तो हमें नींद की ज़रूरत थी
सहर की आस में हम लोग रात भर जागे
जावेद अनवर
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कोई कहानी कोई वाक़िआ सुना तो सही
अगर हँसा नहीं सकता मुझे रुला तो सही
जावेद अनवर
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निकल गुलाब की मुट्ठी से और ख़ुशबू बन
मैं भागता हूँ तिरे पीछे और तू जुगनू बन
जावेद अनवर
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शाम प्यारी शाम उस पर भी कोई दर खोल दे
शाख़ पर बैठी हुई है एक बेघर फ़ाख़्ता
जावेद अनवर
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तुझे मैं ग़ौर से देखूँ मैं तुझ से प्यार करूँ
ऐ मेरे बुत तू मिरे बुत-कदों से बाहर आ
जावेद अनवर
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लहू का हाल है 'जावेद' ऐसा जैसे नश्शा हो
धड़कना दिल में भी बाद-ए-सबा के साथ भी रहना
जावेद अहमद
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आगही से मिली है तन्हाई
आ मिरी जान मुझ को धोका दे
जावेद अख़्तर
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