क़ामत तिरी दलील क़यामत की हो गई
काम आफ़्ताब-ए-हश्र का रुख़्सार ने किया
हैदर अली आतिश
क़ैद-ए-मज़हब की गिरफ़्तारी से छुट जाता है
हो न दीवाना तो है अक़्ल से इंसाँ ख़ाली
हैदर अली आतिश
रख के मुँह सो गए हम आतिशीं रुख़्सारों पर
दिल को था चैन तो नींद आ गई अँगारों पर
हैदर अली आतिश
सफ़र है शर्त मुसाफ़िर-नवाज़ बहुतेरे
हज़ार-हा शजर-ए-साया-दार राह में है
हैदर अली आतिश
सख़्ती-ए-राह खींचिए मंज़िल के शौक़ में
आराम की तलाश में ईज़ा उठाइए
हैदर अली आतिश
शब-ए-वस्ल थी चाँदनी का समाँ था
बग़ल में सनम था ख़ुदा मेहरबाँ था
हैदर अली आतिश
शहर में क़ाफ़िया-पैमाई बहुत की 'आतिश'
अब इरादा है मिरा बादिया-पैमाई का
हैदर अली आतिश

