गुज़िश्ता साल जो देखा वो अब की साल नहीं
ज़माना एक सा बस हर बरस नहीं चलता
जोर्ज पेश शोर
है तलाश-ए-दो-जहाँ लेकिन ख़बर अपनी किसे
जीते-जी तक जुस्तुजू सब कुछ है और फिर कुछ नहीं
जोर्ज पेश शोर
हवा के घोड़े पे रहता है वो सवार मुदाम
किसी का उस के बराबर फ़रस नहीं चलता
जोर्ज पेश शोर
इक ख़याल-ओ-ख़्वाब है ए 'शोर' ये बज़्म-ए-जहाँ
यार और जाम-ओ-सुबू सब कुछ है और फिर कुछ नहीं
जोर्ज पेश शोर
इक नज़र ने किया है काम तमाम
आरज़ू भी तो थी यही दिल की
जोर्ज पेश शोर
इसी ख़याल में दिन-रात मैं तड़पता हूँ
तुम्हीं क़रार भी दोगे जो बे-क़रार किया
जोर्ज पेश शोर
जान पर अपनी हाए क्यूँ बनती
बात जो मानते कभी दिल की
जोर्ज पेश शोर

