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शकील बदायुनी शायरी | शाही शायरी

शकील बदायुनी शेर

85 शेर

मुश्किल था कुछ तो इश्क़ की बाज़ी को जीतना
कुछ जीतने के ख़ौफ़ से हारे चले गए

was difficult to win the game of love to a degree
and so I went on losing being afraid of victory

शकील बदायुनी




नज़र-नवाज़ नज़ारों में जी नहीं लगता
वो क्या गए कि बहारों में जी नहीं लगता

शकील बदायुनी




फिर वही जोहद-ए-मुसलसल फिर वही फ़िक्र-ए-मआश
मंज़िल-ए-जानाँ से कोई कामयाब आया तो क्या

शकील बदायुनी




पी शौक़ से वाइज़ अरे क्या बात है डर की
दोज़ख़ तिरे क़ब्ज़े में है जन्नत तिरे घर की

शकील बदायुनी




रहमतों से निबाह में गुज़री
उम्र सारी गुनाह में गुज़री

शकील बदायुनी




रिंद-ए-ख़राब-नोश की बे-अदबी तो देखिए
निय्यत-ए-मय-कशी न की हाथ में जाम ले लिया

शकील बदायुनी




सब करिश्मात-ए-तसव्वुर हैं 'शकील'
वर्ना आता है न जाता है कोई

शकील बदायुनी




शाम-ए-ग़म करवट बदलता ही नहीं
वक़्त भी ख़ुद्दार है तेरे बग़ैर

शकील बदायुनी




शग़ुफ़्तगी-ए-दिल-ए-कारवाँ को क्या समझे
वो इक निगाह जो उलझी हुई बहार में है

शकील बदायुनी