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ज़िंदगानी सराब की सी तरह | शाही शायरी
zindagani sarab ki si tarah

ग़ज़ल

ज़िंदगानी सराब की सी तरह

आबरू शाह मुबारक

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ज़िंदगानी सराब की सी तरह
बाद-बंदी हुबाब की सी तरह

तुझ उपर ख़ून बे-गुनाहों का
चढ़ रहा है शराब की सी तरह

कौन चाहेगा घर बसर तुझ को
मुझ से ख़ाना-ख़राब की सी तरह

टुक ख़बर ले कि तेरे हाथों सीं
जल रहा हूँ कबाब की सी तरह