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यूरिश-ए-आलाम है लेकिन मिरा दिल एक है | शाही शायरी
yurish-e-alam hai lekin mera dil ek hai

ग़ज़ल

यूरिश-ए-आलाम है लेकिन मिरा दिल एक है

अज़ीज़ वारसी

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यूरिश-ए-आलाम है लेकिन मिरा दिल एक है
सैंकड़ों मौजों की ज़द में आज साहिल एक है

यूँ तो हैं लाखों हसीं उल्फ़त के क़ाबिल एक है
चार-जानिब हैं शुआएँ माह-ए-कामिल एक है

आह-ए-सोज़ाँ नाला-ए-शब-गीर या ज़ब्त-ओ-सुकूँ
बद-नसीबों के लिए इन सब का हासिल एक है

क़ैस हो फ़रहाद हो वामिक़ हो या महमूद हो
हैं निगाहें मुख़्तलिफ़ लैला-ए-महमिल एक है

दामन-ए-हर-मौज ही अपना तो साहिल है 'अज़ीज़'
कौन कहता है कि बहर-ए-ग़म में साहिल एक है