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ये सोच कर मैं रुका था कि तू पुकारेगा | शाही शायरी
ye soch kar main ruka tha ki tu pukarega

ग़ज़ल

ये सोच कर मैं रुका था कि तू पुकारेगा

राशिद अनवर राशिद

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ये सोच कर मैं रुका था कि तू पुकारेगा
किसे ख़बर थी खंडर चार-सू पुकारेगा

कभी तो शाख़-ए-तअल्लुक़ में फूल आएँगे
कभी तो सर्द बदन को लहू पुकारेगा

मैं एक पल के लिए भी अगर हुआ ओझल
मिरा जुनून मुझे कू-ब-कू पुकारेगा

ज़मीन उस के लिए तंग होती जाएगी
ख़ुदा-ए-इश्क़ को जो बे-वुज़ू पुकारेगा

किसी तरह भी इशारों से मुतमइन न हुआ
शुऊर-ए-ज़ात तुझे रू-ब-रू पुकारेगा