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वो चर्चा जी के झंझट का हुआ है | शाही शायरी
wo charcha ji ke jhanjhaT ka hua hai

ग़ज़ल

वो चर्चा जी के झंझट का हुआ है

ख़ालिद अहमद

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वो चर्चा जी के झंझट का हुआ है
कि दिल का पासबाँ खटका हुआ है

वो मिसरा था कि इक गुल-रंग चेहरा
अभी तक ज़ेहन में अटका हुआ है

हम उन आँखों के ज़ख़माए हुए हैं
ये हाथ उस हाथ का झटका हुआ है

यक़ीनी है अब इस दिल की तबाही
ये क़र्या राह से भटका हुआ है

गिला इस का करें किस दिल से 'ख़ालिद'
ये दिल कब एक चौखट का हुआ है