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वक़्त से कहियो ज़रा कम कम चले | शाही शायरी
waqt se kahiyo zara kam kam chale

ग़ज़ल

वक़्त से कहियो ज़रा कम कम चले

मुनीर नियाज़ी

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वक़्त से कहियो ज़रा कम कम चले
कौन याद आया है आँसू थम चले

दम-ब-ख़ुद क्यूँ है ख़िज़ाँ की सल्तनत
कोई झोंका कोई मौज-ए-ग़म चले

चार सू बाजें पलों की पाएलें
इस तरह रक़्क़ासा-ए-आलम चले

देर क्या है आने वाले मौसमो
दिन गुज़रते जा रहे हैं हम चले

किस को फ़िक्र-ए-गुम्बद-ए-क़स्र-ए-हबाब
आबजू पैहम चले पैहम चले