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उस बंदा की चाह देखिएगा | शाही शायरी
us banda ki chah dekhiyega

ग़ज़ल

उस बंदा की चाह देखिएगा

इंशा अल्लाह ख़ान

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उस बंदे की चाह देखिएगा
और उस का निबाह देखिएगा

मैं कैसे निबाहता हूँ तुम से
इंशा-अल्लाह देखिएगा

फ़ौजें अश्कों की तुल रही हैं
ये हशमत-ओ-जाह देखिएगा

आशिक़ मुझे जान करते हैं क़त्ल
तक़्सीर ओ गुनाह देखिएगा

'इंशा' से आप अब ख़फ़ा हैं
यूँ भर के निगाह देखिएगा