उस बंदे की चाह देखिएगा
और उस का निबाह देखिएगा
मैं कैसे निबाहता हूँ तुम से
इंशा-अल्लाह देखिएगा
फ़ौजें अश्कों की तुल रही हैं
ये हशमत-ओ-जाह देखिएगा
आशिक़ मुझे जान करते हैं क़त्ल
तक़्सीर ओ गुनाह देखिएगा
'इंशा' से आप अब ख़फ़ा हैं
यूँ भर के निगाह देखिएगा
ग़ज़ल
उस बंदा की चाह देखिएगा
इंशा अल्लाह ख़ान

