EN اردو
उन को मैं ने अपना कहा है | शाही शायरी
un ko maine apna kaha hai

ग़ज़ल

उन को मैं ने अपना कहा है

आसी रामनगरी

;

उन को मैं ने अपना कहा है
इतनी ही बस अपनी ख़ता है

राही हैराँ देख रहा है
रहज़न ही अब राह-नुमा है

ये दिल उन से जब से लगा है
उन के सिवा सब भूल गया है

उस जीने से बाज़ हम आए
जीना क्या है एक सज़ा है

लब खुलते ही फूल हैं झड़ते
कितनी प्यारी उन की अदा है