तुझे हम याद हर-दम ऐ सितम ईजाद करते हैं
यूँही अपने दिल-ए-नाशाद को हम शाद करते हैं
बसा कर एक दुनिया आज रंज-ओ-यास-ओ-हिर्मां की
हम अपने दिल के वीराने को फिर आबाद करते हैं
असीरी से हमें कुछ हो गई है ऐसी उन्सिय्यत
क़फ़स से छूट कर भी हम क़फ़स को याद करते हैं
हमारी फ़ितरत-ए-मर्दाना की तफ़रीह होती है
करम करते हैं हम पर आप गर बेदार करते हैं
ग़ज़ल
तुझे हम याद हर-दम ऐ सितम ईजाद करते हैं
आसी रामनगरी

