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सीना साफ़ी सूँ मिस्ल-ए-दर्पन कर | शाही शायरी
sina safi sun misl-e-darpan kar

ग़ज़ल

सीना साफ़ी सूँ मिस्ल-ए-दर्पन कर

दाऊद औरंगाबादी

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सीना साफ़ी सूँ मिस्ल-ए-दर्पन कर
शम्-ए-फ़ानूस दिल की रौशन कर

याद कर के ख़याल गुल-रू का
दश्त-ए-दिल में बहार-ए-गुलशन कर

गर नहीं सुब्हा हाथ में हर वक़्त
दाना-ए-दम सूँ पिव की सिमरन कर

गरचे हाएल है पर्दा-ए-ग़फ़लत
दीदा-ए-दिल कूँ खोल रौज़न कर

ऐब-पोशी कूँ ख़ल्क़ की 'दाऊद'
चश्म सेती पलक कूँ सोज़न कर