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शक्ल-ए-जानाना जा-ब-जा हैं हम | शाही शायरी
shakl-e-jaanana ja-ba-ja hain hum

ग़ज़ल

शक्ल-ए-जानाना जा-ब-जा हैं हम

शाह आसिम

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शक्ल-ए-जानाना जा-ब-जा हैं हम
कहीं नाज़ और कहीं अदा हैं हम

कहीं ईसा हैं हम कहीं मुर्दा
कहीं ज़िंदा कहीं फ़ना हैं हम

कहीं आला हैं और कहीं अदना
कहीं सुल्ताँ कहीं गदा हैं हम

हैं कहीं आशिक़-ए-जिगर-ए-ख़स्ता
कहीं माशूक़-ए-दिल-रुबा हैं हम

कहीं क़तरा हैं और कहीं दरिया
कहीं कश्ती के नाख़ुदा हैं हम

हैं कहीं हम दवा-ए-दाफ़ा-ए-दर्द
और कहीं दर्द-ए-ला-दवा हैं हम

कहीं हैं शाह सूरत-ए-ख़ादिम
और कहीं 'आसिम'-ए-गदा हैं हम