सर होने दो ये कार-ए-जहाँ ऐश करेंगे
हम लोग भी ऐ दिल-ज़दगाँ ऐश करेंगे
कुछ अर्ज़ करेंगे तब-ओ-ताब-ए-ख़स-ओ-ख़ाशाक
आ जा कि ज़रा बर्क़-ए-बुताँ ऐश करेंगे
अब दिल में शरर कोई तलब का न हवस का
इस ख़ाक पे क्या ख़ुश-बदनाँ ऐश करेंगे
कुछ दूर तो बहते चले जाएँगे भँवर तक
कुछ देर सर-ए-आब-ए-रवाँ ऐश करेंगे
इस आस पे सच्चाई के दिन काट रहे हैं
आती है शब-ए-वहम-ओ-गुमाँ ऐश करेंगे
ग़ज़ल
सर होने दो ये कार-ए-जहाँ ऐश करेंगे
इरफ़ान सिद्दीक़ी

