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सारे चमन को दश्त में तब्दील कर गए | शाही शायरी
sare chaman ko dasht mein tabdil kar gae

ग़ज़ल

सारे चमन को दश्त में तब्दील कर गए

दिल अय्यूबी

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सारे चमन को दश्त में तब्दील कर गए
बे-दर्द थे जो ऐन जवानी में मर गए

मल्बूस-ए-अहल-ए-होश का मेआ'र देख कर
दीवाने बे-लिबास दरख़्तों से डर गए

शायद उदासियों पे तरस आ गया मिरी
कल रात शहर-ए-जाँ में फ़रिश्ते उतर गए

सुनते हैं उन पे नूर बरसता है आज तक
जिन वादियों से हो के तिरे ख़ुश-नज़र गए

हम सर-फिरे भी ख़ूब थे ऐ 'दिल' कि इश्क़ में
नामूस-ओ-नंग-ओ-नाम भी क़ुर्बान कर गए