EN اردو
मौत इलाज-ए-ग़म तो है मौत का आना सहल नहीं | शाही शायरी
maut ilaj-e-gham to hai maut ka aana sahl nahin

ग़ज़ल

मौत इलाज-ए-ग़म तो है मौत का आना सहल नहीं

मेला राम वफ़ा

;

मौत इलाज-ए-ग़म तो है मौत का आना सहल नहीं
जान से जाना सहल सही जान का जाना सहल नहीं

हमदर्दी हमदर्दी में जान ही ले कर टलते हैं
इन ज़ालिम हमदर्दों से जान छुड़ाना सहल नहीं

बर्क़ भी गिरती है अक्सर ख़िर्मन भी जलते हैं मगर
अपने हाथों ख़िर्मन को आग लगाना सहल नहीं

ग़म के खाने वालों को खा जाता है ग़म आख़िर
ग़म का खाना मुश्किल है ग़म का खाना सहल नहीं

दावा-ए-मज्ज़ूबियत क्या मुझ से करे मंसूर 'वफ़ा'
बक उठना है सहल मगर बकते जाना सहल नहीं