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मैं तुझे वाह क्या तमाशा है | शाही शायरी
main tujhe wah kya tamasha hai

ग़ज़ल

मैं तुझे वाह क्या तमाशा है

मीर असर

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मैं तुझे वाह क्या तमाशा है
ज़ेहन में आश्ना तराशा है

हाथ में रखियो तू सँभाले हुए
दिल तो मेरा ये सीशा-बाशा है

तू जो तोले है मेरे मन की चाह
कुछ तिरे हाँ भी तोला-माशा है

क्या कहूँ तेरी काविश-ए-मिज़ा ने
किस तरह से जिगर ख़राशा है

ख़ैर गुज़रे 'असर' तू है बेबाक
और वो शोख़ बे-तहाशा है