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मैं जिस जगह हूँ वहाँ बूद-ओ-बाश किस की है | शाही शायरी
main jis jagah hun wahan bud-o-bash kis ki hai

ग़ज़ल

मैं जिस जगह हूँ वहाँ बूद-ओ-बाश किस की है

फ़ाज़िल जमीली

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मैं जिस जगह हूँ वहाँ बूद-ओ-बाश किस की है
मिरे बदन के कफ़न में ये लाश किस की है

तुझे ख़याल में ला कर गुल-ओ-नुजूम के साथ
ये देखना है कि अच्छी तराश किस की है

ख़याल-ओ-ख़्वाब की गलियों में भी है वीरानी
मिरी उदास नज़र को तलाश किस की है

तुम्हारा काम नहीं तो फिर इंतिज़ाम है क्या
दिल-ओ-जिगर पे ये एक इक ख़राश किस की है

जो आप अपनी ही पसमांदगी पे नाज़ करे
मैं ख़ुद नहीं तो ये तर्ज़-ए-मआ'श किस की है