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क्या क्या नहीं किया मगर उन पर असर नहीं | शाही शायरी
kya kya nahin kiya magar un par asar nahin

ग़ज़ल

क्या क्या नहीं किया मगर उन पर असर नहीं

बाक़र मेहदी

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क्या क्या नहीं किया मगर उन पर असर नहीं
शायद कि अपनी सई-ए-जुनूँ कार-गर नहीं

घबरा के चाहते हैं कि गर्दिश में हम रहें
मंज़िल कहीं न हो कोई ऐसा सफ़र नहीं

मिल जाए एक रात मोहब्बत की ज़िंदगी
फिर ख़्वाहिश-ए-हयात हमें उम्र-भर नहीं

आवारगी में लुत्फ़ ओ अज़िय्यत के बावजूद
ऐसा नहीं हुआ है कि फ़िक्र-ए-सहर नहीं