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ख़ुश्बू संदल और न गहना दुख देगा | शाही शायरी
KHushbu sandal aur na gahna dukh dega

ग़ज़ल

ख़ुश्बू संदल और न गहना दुख देगा

इशरत आफ़रीं

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ख़ुश्बू संदल और न गहना दुख देगा
इक जैसा दुख सहते रहना दुख देगा

डरती क्यूँ है आँखें तेरी अच्छी हैं
लेकिन इन का चुप चुप बहना दुख देगा

जो हम दोनों ने मिल-जुल कर झेले थे
वो दुख तेरा तन्हा सहना दुख देगा

जिस ने हम को आँगन आँगन बाँट दिया
अब तो उस दीवार का ढहना दुख देगा