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कर्ब में प्यार के नग़्मात सुनाईं कैसे | शाही शायरी
karb mein pyar ke naghmat sunain kaise

ग़ज़ल

कर्ब में प्यार के नग़्मात सुनाईं कैसे

बख़्तियार ज़िया

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कर्ब में प्यार के नग़्मात सुनाईं कैसे
ग़म हक़ीक़त से हक़ीक़त को छुपाएँ कैसे

लब-ओ-आरिज़ के तक़ाज़ों को भला कर यारो
दूर आ पहुँचे हैं अब लौट के जाएँ कैसे

अन-गिनत जाम पिए ज़िल्लत-ओ-रुसवाई के
ज़िंदगी और तिरे नाज़ उठाएँ कैसे

दिल जो दुखता है 'ज़िया' आँख भी भर आती है
लोग फ़ितरत के तक़ाज़ों को छुपाएँ कैसे