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कभू हम से भी वफ़ा कीजिएगा | शाही शायरी
kabhu humse bhi wafa kijiyega

ग़ज़ल

कभू हम से भी वफ़ा कीजिएगा

मीर असर

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कभू हम से भी वफ़ा कीजिएगा
या यही जौर-ओ-जफ़ा कीजिएगा

देखें दुश्नाम कहाँ तक दोगे
दम में सौ बार दुआ कीजिएगा

नज़र आता है गिरह ज़ुल्फ़ से खोल
हर तरफ़ फ़ित्ना बपा कीजिएगा

जान-ओ-दिल से भी गुज़र जाएँगे
अगर ऐसा ही ख़फ़ा कीजिएगा

की है बंदे के लिए ये बे-दाद
रहम टुक बहर-ए-ख़ुदा कीजिएगा

इश्क़ के सदक़े उठाता था दिल
अब तो वो भी नहीं क्या कीजिएगा

अब तो टुक मेरा कहा कीजिए फिर
चाहिएगा सो कहा कीजिएगा

गो उसे अहल-ए-वफ़ा से है ख़िलाफ़
अब 'असर' तू भी वफ़ा कीजिएगा