जोश उबलता है पिघलती है तमन्ना दिल में
आग ही आग है इस सोज़-सरापा दिल में
तेरा जल्वा है कि रंगीन सा धोका दिल में
कभी ज़ुल्मत कभी पैदा है उजाला दिल में
अब नहीं तेरे दो-आलम की ज़रूरत मुझ को
इश्क़ ने तेरे बसा दी नई दुनिया दिल में
अपनी आँखें तो उठा महव-शुदा जल्वे भी
नज़र आएँगे तुझे अंजुमन-आरा दिल में
नाज़ था उन को कि हर क़ैद से आज़ाद हैं वो
मैं ने कर ही लिया पाबंद-ए-तमन्ना दिल में
फूँकता रहता है कौनैन को जिन का परतव
बे-ज़रर है उन्हीं जल्वों का तमाशा दिल में
आप ही बादा हूँ मैं आप ही साक़ी 'मख़मूर'
साग़र आँखों में मिरी और है मीना दिल में
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ग़ज़ल
जोश उबलता है पिघलती है तमन्ना दिल में
मख़मूर जालंधरी