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जैसा चाहा वैसा मंज़र देखा है | शाही शायरी
jaisa chaha waisa manzar dekha hai

ग़ज़ल

जैसा चाहा वैसा मंज़र देखा है

राना आमिर लियाक़त

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जैसा चाहा वैसा मंज़र देखा है
यानी हम ने अपने अंदर देखा है

उन आँखों को देखने वाले कहते हैं
इस दुनिया को हम ने बेहतर देखा है

जाने वाले तुझ को इतना याद रहे
हम ने तेरा हाथ पकड़ कर देखा है

तेरी कैसे बन जाती है दुनिया से
मैं ने अपना आप बदल कर देखा है