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जाम ख़ाली जहाँ नज़र आया | शाही शायरी
jam Khaali jahan nazar aaya

ग़ज़ल

जाम ख़ाली जहाँ नज़र आया

अज़ीज़ लखनवी

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जाम ख़ाली जहाँ नज़र आया
मेरी आँखों में ख़ूँ उतर आया

वो बहुत कम किसी ने देखा है
मुझ को जो कुछ यहाँ नज़र आया

झुक गए आसमान सज्दे में
कौन ये अपने बाम पर आया

काँप उठा चर्ख़ हिल गई दुनिया
वो जहाँ अपनी बात पर आया

उस ने पूछा मिज़ाज कैसा है
दिल जो उमडा हुआ था भर आया

जब कभी उस ने की नज़र मुझ पर
एक छाला नया उभर आया

तेरी जानिब से होशियार गया
अपनी जानिब से बे-ख़बर आया

जब किया क़स्द-ए-ज़ब्त-ए-आह 'अज़ीज़'
दिल में छाला सा इक उभर आया