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हस्ती की क़ैद से ऐ दिल आज़ाद होइए | शाही शायरी
hasti ki qaid se ai dil aazad hoiye

ग़ज़ल

हस्ती की क़ैद से ऐ दिल आज़ाद होइए

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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हस्ती की क़ैद से ऐ दिल आज़ाद होइए
सहरा में जा के ख़ूब सा हँस हँस के रोइए

दोनों जहाँ का शादी ओ ग़म दिल से भूल कर
पाँव दराज़ कर के फ़राग़त से सोइए

ऐ चश्म अज़-बराए-ख़ुदा गर मदद करे
आमाल-नामा अपना तो रो रो के धोइए

'हातिम' किसी से अपनी मुसीबत को तू न कह
क्या फ़ाएदा जो अपना भरम मुफ़्त खोइए