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देख बुनियाद रब की आदम है | शाही शायरी
dekh buniyaad rab ki aadam hai

ग़ज़ल

देख बुनियाद रब की आदम है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

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देख बुनियाद रब की आदम है
जान लेगा अगर तू महरम है

सब सिफ़त ऊस की देख ले उन में
कह तू बंदा ख़ुदा से क्या कम है

हर नफ़स क्यूँ कहें हैं साहिब-ए-दम
कि जहाँ बीच उम्र-ए-दो-दम है

पास है और नज़र नहीं आता
मेरे वहशी में इस क़दर रम है

तेरे बंदे हैं सब वले सब में
बंदा-ए-कमतरीन 'हातम' है