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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

इक दम के वास्ते न किया क्या क्या ऐ 'रज़ा'
देखा छुपाया तोड़ा बनाया कहा सुना

रज़ा अज़ीमाबादी




इलाही चश्म-ए-बद उस से तू दूर ही रखियो
कि मस्त सख़्त हूँ मैं और अयाग़ नाज़ुक-तर

रज़ा अज़ीमाबादी




इलाही चश्म-ए-बद उस से तू दूर ही रखियो
कि मस्त सख़्त हूँ मैं और अयाग़ नाज़ुक-तर

रज़ा अज़ीमाबादी




इमारत दैर ओ मस्जिद की बनी है ईंट ओ पत्थर से
दिल-ए-वीराना की किस चीज़ से तामीर होती है

रज़ा अज़ीमाबादी




इस चश्म ओ दिल ने कहना न माना तमाम उम्र
हम पर ख़राबी लाई ये घर ही की फूट-फाट

रज़ा अज़ीमाबादी




इस चश्म ओ दिल ने कहना न माना तमाम उम्र
हम पर ख़राबी लाई ये घर ही की फूट-फाट

रज़ा अज़ीमाबादी




जिस तरह हम रहे दुनिया में हैं उस तरह 'रज़ा'
शैख़ बुत-ख़ाने में काबे में बरहमन न रहा

रज़ा अज़ीमाबादी