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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

सब लोग इस से पहले कि देवता समझते
हम ने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है

राजेश रेड्डी




सब लोग इस से पहले कि देवता समझते
हम ने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है

राजेश रेड्डी




सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया
भटक गया तो नया रास्ता निकल आया

राजेश रेड्डी




शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं
मुस्कुरा देते हैं बच्चे और मर जाता हूँ मैं

राजेश रेड्डी




शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं
मुस्कुरा देते हैं बच्चे और मर जाता हूँ मैं

राजेश रेड्डी




सोच लो कल कहीं आँसू न बहाने पड़ जाएँ
ख़ून का क्या है रगों में वो यूँही खौलता है

राजेश रेड्डी




वो दिल से कम ज़बाँ ही से ज़ियादा बात करता था
जभी उस के यहाँ गहराई कम वुसअत ज़ियादा थी

राजेश रेड्डी