सब लोग इस से पहले कि देवता समझते
हम ने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है
राजेश रेड्डी
सब लोग इस से पहले कि देवता समझते
हम ने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है
राजेश रेड्डी
सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया
भटक गया तो नया रास्ता निकल आया
राजेश रेड्डी
शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं
मुस्कुरा देते हैं बच्चे और मर जाता हूँ मैं
राजेश रेड्डी
शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं
मुस्कुरा देते हैं बच्चे और मर जाता हूँ मैं
राजेश रेड्डी
सोच लो कल कहीं आँसू न बहाने पड़ जाएँ
ख़ून का क्या है रगों में वो यूँही खौलता है
राजेश रेड्डी
वो दिल से कम ज़बाँ ही से ज़ियादा बात करता था
जभी उस के यहाँ गहराई कम वुसअत ज़ियादा थी
राजेश रेड्डी

