बसर करे जो मुजाहिदाना हयात उसे दाइमी मिलेगी
न भीक में ज़िंदगी मिली है न भीक में ज़िंदगी मिलेगी
निसार इटावी
छुपे तो कैसे छुपे चमन में मिरा तिरा रब्त-ए-वालिहाना
कली कली हुस्न की कहानी नज़र नज़र इश्क़ का फ़साना
निसार इटावी
दिल में क्या क्या गुमाँ गुज़रते हैं
मुस्कुराओ न बात से पहले
निसार इटावी
कल जो ज़िक्र-ए-जाम-ओ-मीना आ गया
मेरी तौबा को पसीना आ गया
निसार इटावी
कली की ख़ू है बहर-हाल मुस्कुराने की
वगर्ना रास किसे है हुआ ज़माने की
निसार इटावी
कितने पुर-हौल अँधेरों से गुज़र कर ऐ दोस्त
हम तिरे हुस्न की रख़्शंदा सहर तक पहुँचे
निसार इटावी
कुछ हुस्न के फ़साने तरतीब दे रहा हूँ
दफ़्तर उलट रहा हूँ हर फूल हर कली का
निसार इटावी

