ईसा कभी न जाते लेकिन तुम्हारे ग़म में
वो भी तो मर रहे हैं जो आसमान पर हैं
मुज़्तर ख़ैराबादी
ईसा से दवा-ए-मरज़-ए-इश्क़ न होगी
हाँ उन को कोई ढूँड के ले आए कहीं से
मुज़्तर ख़ैराबादी
इक हम हैं कि हम ने तुम्हें माशूक़ बनाया
इक तुम हो कि तुम ने हमें रक्खा न कहीं का
मुज़्तर ख़ैराबादी
इक हम कि हम को सुब्ह से है शाम की ख़ुशी
इक तुम कि तुम को शाम का धड़का सहर से है
मुज़्तर ख़ैराबादी
इक सदमा-ए-मोहब्बत इक सदमा-ए-जुदाई
गिनती के दो हैं लेकिन लाखों की जान पर हैं
मुज़्तर ख़ैराबादी
इकट्ठे कर के तेरी दूसरी तस्वीर खींचूँगा
वो सब जल्वे जो छन छन कर तिरी चिलमन से निकलेंगे
मुज़्तर ख़ैराबादी
इलाज-ए-दर्द-ए-दिल तुम से मसीहा हो नहीं सकता
तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता
मुज़्तर ख़ैराबादी

