गुफ़्तुगू का कोई तो मिलता सिरा
फिर उसे नाराज़ कर के देखते
मनीश शुक्ला
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हम चराग़ों की मदद करते रहे
और उधर सूरज बुझा डाला गया
मनीश शुक्ला
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हम ने तो पास-ए-अदब में बंदा-परवर कह दिया
और वो समझे कि सच में बंदा-परवर हो गए
मनीश शुक्ला
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
काग़ज़ों पर मुफ़्लिसी के मोर्चे सर हो गए
और कहने के लिए हालात बेहतर हो गए
मनीश शुक्ला
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
किसी के इश्क़ में बर्बाद होना
हमें आया नहीं फ़रहाद होना
मनीश शुक्ला
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कितने लोगों से मिलना-जुलना था
ख़ुद से मिलना भी अब मुहाल हुआ
मनीश शुक्ला
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कितनी उजलत में मिटा डाला गया
आग में सब कुछ जला डाला गया
मनीश शुक्ला
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

